हाईकोर्ट ने कहा ; दूध पिलाने की योजना की समीक्षा करे सरकार,मिड-डे मील योजना पर स्पष्टीकरण के लिए संयुक्त सचिव बेसिक शिक्षा तलब

             प्रत्येक बुधवार को प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में दूध वितरण की योजना में नजर आ रही खामियों पर सरकार के पास माकूल जवाब नहीं है। इस स्थिति को देखते हुए हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा है कि वह अपनी योजना की समीक्षा करे।
            अदालत का मानना है कि मध्याह्न भोजन के लिए तय की गई कन्वर्जन कास्ट से योजना किस प्रकार से पूरी की जा सकेगी, यह कोई भी आसानी से समझ सकता है।
              इस मामले को दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने अधिकारियों के जवाब पर असंतोष जाहिर किया है।
                 पीठ ने अगली सुनवाई के दौरान संयुक्त सचिव बेसिक शिक्षा और डीएम कानपुर नगर को अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया है। अधिकारियों से अदालत को यह समझाने की अपेक्षा की गई है कि सप्ताह के प्रत्येक बुधवार को दूध पिलाने की योजना मौजूदा व्यवस्था में किस प्रकार से अमल में लाई जा सकती है।
                   याची विनय कुमार ओझा के अधिवक्ता राकेश पांडेय ने कहा कि दूध पिलाने की योजना में सुरक्षा एक बड़ा सवाल है। कई जिलों से बच्चों के दूध पाकर बीमार पड़ने की रिपोर्ट आ रही है। प्रदेश सरकार 32 रुपये प्रति लीटर में दूध उपलब्ध होने की बात कर रही है। उपलब्ध दूध की गुणवत्ता भी एक बड़ा सवाल है।


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