शिक्षा नीति में बदलाव की तैयारी ; छठी से आठवीं तक के छात्र भी होंगे फेल, शिक्षा का गिरता स्तर बना वजह

              यूपी समेत सभी राज्यों व केंद्रीय शिक्षा बोर्डों में छठीं से आठवीं तक के छात्रों के लिए अब बिना पढ़े पास होना आसान नहीं होगा। अगली क्लास में जाने के लिए अब उन्हें कड़ी मेहनत करनी होगी।
             क्योंकि केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत अब छठी से आठवीं तक सबको पास करने की पॉलिसी खत्म की जा सकती है। पिछले दिनों दिल्ली में हुई राज्यों व केंद्र के शिक्षा बोर्डों के सचिवों की बैठक में इस पर सहमति भी बन गई है।
              इस संबंध में बनाई गई 16 सदस्यीय कमिटी की रिपोर्ट पर अंतिम निर्णय मानव संसाधन मंत्रालय को लेना होगा। फिलहाल यूपी समेत अधिकांश शिक्षा बोर्डों में आठवीं तक छात्रों को पास करना ही होता है। जिससे शिक्षा के स्तर में गिरावट की बात कही जा रही है। इसीलिए बैठक के दौरान इस पालिसी पर ‘रिलुक’ की जरूरत बताई गई है।
              केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति के मसौदे पर काम कर रही है। इसके लिए केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में 16 सदस्यीय कमिटी बनाई गई है। इसमें यूपी, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और तमिलनाडु शिक्षा बोर्डों नहीं चलेगा सिर्फ खेल, पढ़ोगे नहीं तो होगे फेल के सचिव के साथ ही सीबीएसई के सचिव और केंद्रीय विद्यालय संगठन व नवोद्य विद्यालय संगठन के कमिश्नर भी शामिल हैं।
                इसी क्रम में मानव संसाधन मंत्रालय की पहल पर तीन दिन पहले दिल्ली में सभी राज्यों के शिक्षा बोर्डों के सचिवों, केंद्रीय शिक्षा बोर्डों के प्रतिनिधियों और नई शिक्षा नीति का मसौदा तैयार करने के लिए बनी कमिटी की बैठक हुई। इसमें उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव शैल यादव को भी बुलाया गया था।
                हालांकि वह बोर्ड की एक जरूरी बैठक के चलते शामिल नहीं हो पाईं। लेकिन उनके प्रतिनिधि में बैठक में शिरकत की।
               शैल यादव ने बताया कि रिफार्मिंग स्कूल एग्जामिनेशन सिस्टम पर हुई इस बैठक में आठवीं तक आवश्यक रूप से पास करने की नीति को ‘रिलुक’ करने की जरूरत बताई गई।
                लगभग सभी बोर्डों की ओर से बताया गया कि इस पॉलिसी के कारण शिक्षा के स्तर में गिरावट आ रही है। इसलिए इसे बदलने की जरूरत है। बैठक के अंत में छठीं से आठवीं तक एग्जाम कराने और छात्रों को पास और फेल की प्रक्रिया से गुजारने पर सहमति बन गई है। फिलहाल बच्चों को आठवीं तक फेल न करने की नीति पर अधिकांश शिक्षा बोर्ड अमल कर रहे हैं।




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