"नाना पाटेकर " अद्भुत और अविश्वसनीय महानायक

                बेहद साधारण से चेहरे वाले असाधारण इंसान ..".नाना पाटेकर " ....जिनका नाम लेते ही उनके चेहरे से पहले जो डायलाग याद आता है..."ये हिन्दू का खून ये मुसलमान का खून " just kidding.............. अभिनय के क्षेत्र में वो किसी महानायक से कम नही ...लेकिन अभी जिस नेक कार्य से वो चर्चा में आये है वो अद्भुत और अविश्वसनीय है ...|
           .. उन्होंने अपने अकेले के दम पर 5000 से अधिक ऐसे किसान परिवारों को अपने घर से 15000 रूपये आर्थिक सहायता की जिनके किसान मुखिया ने सूखे से व्याकुल हो आत्महत्या कर ली .|...आप में से शायद कुछ लोगो ने न्यूज़ में देखा हो..नाना जब मृतक किसान परिवारों को चेक वितरण कर रहे थे ,.कुछ युवा लडको का समूह मोबाइल पे उनकी चेक देती फोटोज लेने लगा..|
              नाना उन्हें खदेड़ते हुए बिलकुल नाना वाले अंदाज़ में बिफर पड़े .....यहाँ फंक्शन हो रहा है क्या......? ?........ये 5000 लोगो की मय्यत है और तुम जैसे लोग फोटोज ले रहे हो .| . मुझे उनकी तिरंगा वाली सरफिरा, अक्खड़ , सनकी अदा देख हंसी छुट गयी...लेकिन अगले पांच मिनट में स्टेज पर जो हुआ हर देखने वाले की आँखे नम हो गयी |
            ..बेहद कम उम्र की 19 या 20 साल की नाज़ुक , गरीब किसान की ग्रामीण विधवा कापते हाथो से चेक लेते हुए खुद को सम्हाल न पायी..| चेक पकड़ते ही स्टेज पे रोते हुए कांपने लगी |...पितातुल्य हिम्मत बंधाते नाना खुद भी भावुक हो गए...| हज़ारो किसान परिवार जिन्होंने सूखे से अपने घर के मुखिया को खोया और भुखमरी के कगार पर खड़े है |
           ...एक किसान की आपबीती से दिल दहल गया ..जो 30 km वापस अपने गाव पैदल जाने वाला था जिसके पास बस किराए के 30 रुपए न थे...|..नाना ने अपनी जमा पूंजी से 15000 -15000 rs का चेक प्रत्येक परिवार को स्टेज पर ना बुला उस सभा गृह में उन 5000 सीट्स पर जा दोनों हाथो से झुक कर नम आँखों से विधवाओ .,बच्चो ..पिता और उन माताओं को वितरित किये |
              अपने जीवन की सम्पूर्ण जमा पूंजी का दान कर नाना को समझ आया के समस्या उनके अनुमान और आर्थिक हैसियत से ज्यादा विकराल है |. एकला चलो रे से शुरू हुआ ये सफर धीरे धीरे ..." नाम "... संस्था के रूप में सामने आया है । यहाँ एक नाम "अक्षय कुमार" का जोड़ना जरुरी है जो तुरंत एक करोड़ दान करने वाले पहले फिल्मी कलाकार है.|
             "नाम" नाना द्वारा शुरू की गयी सूखा पीड़ित किसानो के लिए आरम्भ की हुई गैर सरकारी संस्था है | .मैंने अभी अभी न्यूज़ में नाना को जमीन पर बैठ बेहद साधारण से अपने घर से अपील करते देखा...कोई किसान आत्महत्या ना करे मेरे घर की आखरी पाई भी दान कर दूंगा , मेरी आंखरी सांस तक मैं किसानो के साथ हूँ .।
             आप मेरे पास आ जाओ । मैं आपकी सहायता कर कोई अहसान नही कर रहा | ये मेरा देश है और आप किसानो का देश पे बहुत क़र्ज़ है |मैं तो कुछ अंश लौटाने की कोशिश कर रहा हूँ | देशवासियों को भी ग्लास में आधा पानी पीने के बाद आधा फेकते समय जरुर सोचना चाहिए की इस आधे ग्लास पानी के लिए आपके ही देश के एक हिस्से में लोग जान दे और जान ले रहे है | लोग एक मटकी पानी के लिए 10 किलोमीटर की दूरी तय कर घन्टो की लाइन लगा रहे है ।
             स्थिति की भयानकता को समझिये और सम्हलिये | सिर्फ पिछले 6 माह में 5000 किसानो ने आत्महत्या कर ली | ये सूखा ,अकाल अंतिम सेफ्टी सायरन है |......ग्लैमर की दुनिया को छोड़, सुदूर बंज़र खेतो में लाचारी का मातम मनाते परिवारों में, आशा का पानी ले पहुँचे इस हरफनमौला फ़कीर महानायक की सुविधाहीन भटकन को दिल से सलाम....आपसे भी गुजारिश है कम से कम उनके जज्बे की खबर दूर दूर तक फैलाइए .  उन्हें सलाम .



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