1337 प्रधानाचार्यो और शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया निरस्त ; स्कूलों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर चलाने का निर्णय 

                 191 मॉडल स्कूलों में लगभग 1337 प्रधानाचार्यो और शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया निरस्त हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से योजना डी-लिंक करने के बाद प्रदेश सरकार ने इन स्कूलों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर चलाने का निर्णय लिया है।
                   यह आदेश प्रमुख सचिव जितेन्द्र कुमार ने 28 सितम्बर को जारी किया है। स्कूलों के संचालन में केंद्र सरकार को 75 व राज्य सरकार को 25 प्रतिशत धन खर्च करना था। इसके तहत प्रदेश के 680 ब्लाकों में विभिन्न चरणों में स्कूल खोले जाने थे। 2010-11 में 148 और 2012-13 में 45 स्कूल स्वीकृत हुए। इनमें से 191 स्कूल बनकर तैयार हैं।
                 स्कूलों के संचालन के लिए गठित राज्य स्तरीय प्रकोष्ठ और राज्य मॉडल स्कूल संगठन को भी समाप्त कर दिया गया है। इस साल मार्च में मंडल स्तर पर भर्ती शुरू हुई। ऑनलाइन आवेदन लिए गए। प्रत्येक मंडल के लिए अभ्यर्थियों से 500 रुपये फीस ली गई। अभ्यर्थियों ने दस हजार तक आवेदन में खर्च किया।
                 लेकिन अब केंद्र सरकार ने हाथ खींच लिया। इससे नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अभ्यर्थियों का रुपया भी डूबा दिख रहा है क्योंकि शासनादेश में फीस वापस करने की कोई बात नहीं की गई है। इलाहाबाद में चाका, बहरिया और उरुवा ब्लाक में 9.06 करोड़ की लागत से तीन मॉडल स्कूल बने हैं।

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