शिक्षामित्र समायोजन प्रकरण :  हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगने से राहतमें परिषद व सरकार, स्कूलों में लौटी रौनक

              उत्तर प्रदेश सरकार एवं बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से हुई दया की अपील कारगर साबित हुई है।
              सुप्रीम कोर्ट को दलीलें रास आई, इससे इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लग गई। ऐसे में पौने दो लाख शिक्षामित्रों एवं परिवारीजन के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है। साथ ही परिषद के स्कूलों का माहौल भी मंगलवार को बदला-बदला नजर आया। स्कूलों में रौनक दिखी और तीन माह बाद पठन-पाठन फिर पटरी पर आता दिखा।
                  हाईकोर्ट ने बीते 12 सितंबर को शिक्षामित्रों के समायोजन को अवैध करार दिया था। इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। असल में प्रदेश सरकार हाईकोर्ट में पूरे समय नियम कानूनों की दलीलें देती रही। वहीं हाईकोर्ट ने एक-एक नियम व दलीलों को झुठला दिया। मसलन, शिक्षा मित्रों को दूरस्थ शिक्षा से तहत मिला प्रशिक्षण पहले असंवैधानिक घोषित बताया गया, बाद में उस पर मुहर लगा दी गई। ऐसे ही कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के मानक तय नहीं कर सकती, उसे चयन के नए स्रोत बनाने का भी हक नहीं है और न ही नियमावली संशोधन हो सकता है।
                कोर्ट ने कहा कि बिना टीईटी पास किए प्राथमिक शिक्षक नहीं बन सकते। ऐसे ही शिक्षामित्रों का नियुक्ति अधिकारी पर भी सवाल उठे। राज्य सरकार एवं बेसिक शिक्षा परिषद ने सुप्रीम कोर्ट में नियम-कानूनों की दुहाई देने के बजाए दया की अपील की और शीर्ष कोर्ट को बताया कि सूबे की शिक्षा व्यवस्था कैसे गड़बड़ाएगी और बेरोजगारी किस हद तक बढ़ जाएगी।
                  इस पर कोर्ट ने तत्काल फौरी राहत दे दी। यह अलग बात है कि याचिका पर अंतिम निर्णय सारे पहलुओं को बारीकी से देखने के बाद ही शीर्ष कोर्ट करेगा।
                 सुप्रीम कोर्ट के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने के दूसरे दिन ही प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों का नजारा बदला था। सुबह कोहरे एवं ठंड के बाद भी स्कूलों में शिक्षामित्रों की मुस्कान एवं चहलकदमी नई गर्माहट का अहसास करा रही थी।
                   करीब तीन महीने बाद नियमित कक्षाएं शुरू हो सकी इससे स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ने के भी आसार हैं। इस आदेश से सिर्फ शिक्षामित्रों को ही राहत नहीं मिली है, बल्कि राज्य सरकार एवं परिषद के अफसर भी इत्मीनान में दिखे।
               इसकी वजह यह है कि शिक्षामित्रों के असहयोग से तमाम स्कूलों में तालाबंदी की नौबत थी जो खुल रहे थे वहां पढ़ाई बाधित हो चुकी थी। परिषद के अफसरों ने अब नए सिरे से माहौल बनने की उम्मीदें संजो रखी हैं।




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