15 हजार शिक्षकों की भर्ती ; चार बार आवेदन लेने के बाद भी नियुक्तियां लटकी,सरकार और कोर्ट ने उड़ाया बेरोजगारों का मजाक

             बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 15 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया नौ दिसंबर 2014 से चल रही है। जनवरी 2015 से आवेदन लेने का सिलसिला इस तरह शुरू हुआ कि वह चार मर्तबा बीते 15 जनवरी 2016 तक चला।
             चौथी बार आवेदन लेने की प्रक्रिया पूरी होने पर परिषद के सचिव संजय सिन्हा ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया था कि एक फरवरी को नए दावेदारों की काउंसिलिंग कराकर पांच फरवरी को सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र बांट दिया जाए।
              इसी बीच महेंद्र प्रताप सिंह व सात अन्य बनाम उप्र राज्य व अन्य के याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 25 जनवरी को भर्ती पर स्थगनादेश जारी कर दिया।
              न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए परिषद ने भर्ती प्रक्रिया अग्रिम आदेशों तक के लिए रोक दिया है।  शिक्षकों की भर्ती का शासनादेश जारी होने के बाद पहली बार बीटीसी, विशिष्ट बीटीसी, उर्दू बीटीसी उत्तीर्ण अभ्यर्थियों, दूसरी बार में केवल डीएड यानी विशेष शिक्षा वाले अभ्यर्थियों से और तीसरी बार हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में विशिष्ट बीटीसी 2004, 2007 एवं 2008 उत्तीर्ण अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन लिया को आवेदन करने का मौका दिया गया।
                चौथी बार हाईकोर्ट के निर्देश पर सबके लिए वेबसाइट खोली गई। इस भर्ती प्रक्रिया में लगातार अभ्यर्थियों की तादाद बढ़ती जा रही है, लेकिन सीटें ज्यों की त्यों हैं, जबकि अभ्यर्थी यह भी मांग कर रहे हैं कि जिस तरह से अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए वेबसाइट खोली गई।
                ऐसा लगता है कि सरकार और कोर्ट दोनों मिलकर बेरोजगारों से एक भद्दा  मजाक करने में लगे है।बेसिक शिक्षा के इतिहास में इससे पहले ऐसा कभी भी देखा नहीं गया।

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