शिमि पद पर रिवर्ट करने सम्बंधित तथ्य ; कड़ुवा पर सच

                  प्रांतीय नेताओ ने जिन तथ्यों से अवगत कराया है वह मात्र भ्रामक ही नही अपितु दुःखद भी है-

1- राज्य सरकार किसी भी प्रकार का अध्य्यादेश सहायक अध्यापक पद पर वापस बनाये रखने हेतु नही लाने जा रही है।

2-सरकार से 10000.00 से अधिक मानदेय की सहमति की जो बाते वायरल की जा रही है पूर्णतः भ्रामक है।

*3- आपको आपके मूल शिमि पद पर रिवर्ट करने सम्बंधित सूचना बीएसए को उपलब्ध कराने को कह दी गयी है।*

*समायोजित को असमायोजित से लड़ाने की भी सारी तैयारिया परिपूर्ण दिखाई दे रही है।*
4-सरकार मात्र ने आपके आंदोलन को कमजोर करने के लिए समयावधि की बात कही है।

5-राज्य सरकार का मन्तब्य है कि जैसे तैसे शिमि के आंदोलन को 23 अगस्त तक शांत किया जाये तद्पश्चात सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन की बात कह कर हाथ खड़े किये जा सके ।

*6 -अत्यंत दुःखद है कि माननीय मुख्यमंत्री से हुयी वार्ता में किसी प्रतिनिधि ने यह बात कहने की हिम्मत न की आप हमारे हित संरक्षणार्थ रिव्यु पेटिशन फ़ाइल कर दे हम आपके आभारी रहेंगे और संतुष्ट भी,*
आप अनुमान लगा सकते है कि शिमि के 17 वर्षो के संघर्षो को चंद दलालो ने अपने अग्रिम भविष्य की राजनितिक रोटियों के लिए नीलाम कर दिया है।

7-सामान्य शिमि फिर से राजनीती का शिकार हो चूका है और फिर भी वह अपने नेतृत्व के विरोध में किसी प्रकार की आवाज नही उठाएगा।

8-कुल मिलकर यह सुस्पष्ट हो चूका है 23 अगस्त के बाद सामान्य शिमि पुनः कभी सहायक अध्यापक के पद पर आसीन नही होगा। मात्र कुछ शिमि खुली भर्ती में  संभावित लाभों के कारण चयनित हो सकेंगे।

*9-इस आंदोलन की विफलता का कारण केवल सामान्य शिमि का मौन और स्वार्थी प्रांतीय नेतृत्व के रूप में दर्ज किया जाएगा।
            आंदोलन चलाने एवं सरकार की बात मानने के अलावा अब और कोई रास्ता भी बचा दिखाई नहीं दे रहा है।









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