नेपाल में सात वर्षों की सियासी कशमकश और मशक्कत के बाद तैयार ऐतिहासिक संविधान आज लागू 

                इसके साथ ही देश एक हिंदू राजशाही से एक पूर्ण रूप से धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणतंत्र में परिवर्तित हो गया। इस बीच अल्पसंख्यक मधेसी समूहों ने सात प्रांतों के संघीय ढांचे को लेकर हिंसक प्रदर्शन किया।
                राष्ट्रपति राम बरन यादव ने संसद में संविधान को जारी करते हुए कहा, मैं संविधान सभा द्वारा पारित और संविधान सभा द्वारा अधिप्रमाणित नेपाल के इस संविधान को आज 20 सितम्बर 2015 से लागू किये जाने की घोषणा करता हूं।
                उन्होंने नया बानेश्वर में संविधान सभा हाल में आयोजित एक विशेष समारोह में कहा, मैं इस ऐतिहासिक मौके पर सभी से एकता और सहयोग का आहवान करता हूं। इस बीच भारत से लगने वाले दक्षिणी क्षेत्रों में हिंसा की छिटपुट घटनाओं की सूचना मिली है जहां अल्पसंख्यक मधेसी समुदाय देश को सात प्रांतों में बांटने के विचार का विरोध कर रहा है।
                  हिमालयी देश के एक हिंदू राजशाही से एक धर्मनिरपेक्ष, संघीय लोकतंत्र के रूप में परिवर्तित होने की खुशी मनाने के लिए हजारों लोग सड़कों पर उतर आये। इस मौके पर राष्ट्रीय ध्वज लहराये गए और पटाखे छोड़े गए। इसके साथ संविधान सभा हाल के सामने भी लोग बड़ी संख्या में एकत्रित हुए थे।
               इस खुशी को मनाने के लिए काठमांडो के अलग अलग स्थानों पर जुलूस निकाले गए। लोगों ने अपना स्वयं का संविधान मिलने की खुशी में सड़कों को सजाया और मोमबत्तियां जलायीं। 67 वर्ष के लंबे समय तक चले लोकतांत्रिक संघर्ष के बाद निर्वाचित प्रतिनिधियों ने संविधान तैयार किया।
            उन्होंने कहा, संविधान हम सभी के लिए हमारी स्वतंत्रता, आजादी, भौगोलिक अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने का एक साझा दस्तावेज है।  इसके साथ ही अंतरिम संविधान को रद्द कर दिया गया।
              राष्ट्रपति यादव ने कहा कि लागू किये गए नये संविधान 2072 ने देश में गणतंत्र को संस्थागत कर दिया है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि संविधान लागू होने से देश में शांति और स्थिरता आयेगी और आर्थिक विकास एवं समद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा, लोगों ने लोकतंत्र और दीर्घकालिक शांति के लिए लगभग सात दशकों तक संघर्ष किया।
               उन्होंने संविधान सभा की अंतिम बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि नये संविधान ने देश में विविधता में एकता बनाये रखने और सभी का अधिकार सुनिश्चित करने का एक मौका दिया है। संविधान सभा ने सर्वसम्मति से एक स्वीकति प्रस्ताव पारित करने के साथ ही राष्ट्रपति को संविधान लागू करने की घोषणा करने के लिए धन्यवाद दिया।

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