उत्तर पूर्वी दिल्ली में अपने तरह का पहला स्कूल ; विश्वविद्यालयों की तर्ज पर खेल, कला और विज्ञान सहित अन्य संकाय बच्चों की रुचि के क्षेत्र में उसके कौशल को विकसित किया जा सकेगा

                 दिल्ली सरकार ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में अपने तरह का ऐसा पहला स्कूल खोलने का फैसला किया है जिसमें विश्वविद्यालयों की तर्ज पर खेल, कला और विज्ञान सहित अन्य संकाय बच्चों की रुचि के क्षेत्र में उसके कौशल को विकसित किया जा सकेगा।
               उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने शुक्रवार को बताया कि इस स्कूल के लिए 30 एकड़ जमीन की हस्तांतरण प्रक्रिया शुरु हो गई है। यह पांच विधानसभा क्षेत्रों करावल नगर, मुस्तफाबाद, गोकलपुरी, बाबरपुर और घोंडा के बच्चों को शिक्षा सुविधा की आपूर्ति करेगा।
                 उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना के मुताबिक इस स्कूल के अंतर्गत 10 विभिन्न स्कूल होंगे। इनमें हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के अलग संकाय के अलावा कला, संस्कृति, रंगमंच, विज्ञान, खेलकूद और अन्य अभिरुचियों के लिए अलग स्कूल होगा।  
                  सिसोदिया ने बताया कि कक्षा एक से 12 तक की शिक्षा व्यवस्था वाले इस स्कूल में बच्चों की नैसर्गिक प्रतिभा को उभारने और विकसित करने में ये संकाय अहम भूमिका निभाएंगे।

चिप युक्त आईकार्ड
सिसोदिया ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा और स्कूल बंक की समस्या से बचने के लिए सरकार अब बच्चों को इलेक्ट्रॉनिक चिप वाले आईकार्ड जारी करेगी। कार्ड की चिप स्कूल के सीसीटीवी कैमरे से अटैच होगी। बच्चे के स्कूल में आने जाने की सूचना सीसीटीवी कैमरे का सर्विलांस सिस्टम अभिभावक को एसएमएस से प्रतिदिन देगा। इससे बच्चे के स्कूल में प्रवेश करने और बाहर निकलने की समय के साथ जानकारी से अभिभावक अवगत रहेंगे। उन्होंने बताया कि इस बावत सर्विलांस तकनीक के क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों से इलैक्ट्रॉनिक चिप युक्त आईकार्ड के  नमूने मंगाये गए हैं। जिससे आगामी सत्र से यह व्यवस्था लागू की जा सके।


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