इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अलग-अलग पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं ; 13 अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन शुरू,प्रवेश परीक्षाएं 25 से 30 मई के बीच

             इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अलग-अलग पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाएं 25 से 30 मई के बीच आयोजित होंगी। प्रवेश प्रकोष्ठ की ओर से शनिवार को नोटिफिकेशन के साथ विस्तृत कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया।
             स्नातक  प्रवेश परीक्षा (यूजीएटी) के लिए 13 से अप्रैल से ऑनलाइन आवेदन शुरू होगा। आखिरी तारीख आठ मई है। अन्य पाठ्यक्रमों के लिए 19 अप्रैल से आवेदन शुरू होगा। आवेदन नौ मई तक किया जा सकेगा।
             विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस बार प्रवेश की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। सिर्फ यूजीएटी के लिए ऑनलाइन के अलावा ऑफलाइन का भी विकल्प दिया गया है। अन्य पाठ्यक्रमों के लिए सिर्फ ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा होगी।
            सभी पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन सिर्फ ऑनलाइन लिया जाएगा। प्रवेश प्रकोष्ठ ने यूजीएटी, परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी), लॉ फाइव ईयर एडमिशन टेस्ट (एलएफएटी), लॉ एडमिशन टेस्ट (एलएटी) बीएड, एलएलएम, एमएड, संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) के साथ इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल कोर्सेज (आईपीएस) में संचालित होने वाले पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षाओं का कार्यक्रम घोषित कर दिया।
             कमेटी ऑफ एडमिशन के चेयरमैन प्रोफेसर आरके सिंह ने शनिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि पीजीएटी और क्रेट की प्रक्रिया आसान की गई है।
             इसके अंतर्गत परास्नातक में नॉन सब्जेक्ट की व्यवस्था खत्म कर दी गई है। इसके तहत अभ्यर्थियों को संबंधित विषय की परीक्षा देनी होगी। पहले उन्हें स्नातक में लिए गए दो विषयों की प्रवेश परीक्षा देनी होती थी। उसका एवरेज निकालकर मेरिट तय होती थी। दोनों प्रवेश परीक्षाओं में वस्तुनिष्ठ आधारित पेपर होंगे। पीजीएटी में दो खंड में सामान्य अध्ययन और संबंधित विषय से प्रश्न होंगे। दोनों की मेरिट जोड़कर मेरिट बनेगी।
               प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर बीएन सिंह ने बताया कि कार्यक्रम तय करते समय बीएचचू, एएमयू के अलावा इंजीनियरिंग और मेडिकल कालेजों की प्रवेश परीक्षाओं को ध्यान में रखा गया है। इसके बावजूद यदि कोई परीक्षा टकराती है तो कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है। इस संबंध में परीक्षा कराने वाली संस्था टीसीएस से बात हो चुकी है।
                उन्हाेंने बताया कि यूजीएटी के लिए 13 अप्रैल से आठ मई तक आवेदन किया जा सकेगा। अभ्यर्थी नौ मई तक फीस जमा कर सकेंगे। फीस ऑनलाइन तथा चालान के माध्यम से जमा होगी।
                अन्य पाठ्यक्रमों के लिए 19 अप्रैल से नौ मई तक आवेदन किया जा सकेगा। फीस 10 मई तक जमा होगी। सभी पाठ्यक्रमों का एडमिट कार्ड 21 मई को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा।
                 उन्होंने बताया कि 15 जून को सभी प्रवेश परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। इसके बाद 20 जून से काउंसिलिंग की तैयारी है।
                  इविवि में सभी पाठ्यक्रमों के लिए पहली बार ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो इसलिए मॉक टेस्ट कराया जाएगा। यह पूरी व्यवस्था टीसीएस की तरफ से की गई है। मॉक टेस्ट की तारीख और स्थान की जानकारी हर अभ्यर्थी मैसेज आदि माध्यम से दी जाएगी।
                 परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरा से नजर रखी जाएगी। सभी केंद्र सेंट्रल सर्वर रूम से लिंक भी होंगे। इसके अलावा विश्वविद्यालय की ओर से पर्यवेक्षक भेजे जाएंगे।
                 निदेशक प्रोफेसर बीपी सिंह ने बताया कि प्रदेश में इलाहाबाद के अलावा कानपुर, वाराणसी, लखनऊ, गोरखपुर आदि जिलों में परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा। इनके अलावा दिल्ली तथा अन्य सभी प्रमुख राज्य की राजधानियाें में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। यदि किसी केंद्र पर 20 से कम अभ्यर्थी हैं तो उन्हें दूसरे नजदीकी राज्य के केंद्र पर भेजा जाएगा।
                  प्रोफेसर आरके सिंह ने बताया कि इलाहाबाद में 10 से 12 हजार अभ्यर्थियों की ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा कराई जा सकती है। अन्य जिलों में भी तकरीबन इतने ही अभ्यर्थियों की परीक्षा कराई जा सकती है। यदि किसी जगह क्षमता से अधिक अभ्यर्थी हुए तो छात्राओं और दिव्यांग को उसी जिलें में सेंटर दिया जाएगा। छात्रों को नजदीकी जिले में सेंटर दिया जाएगा। इसके लिए अभ्यर्थियों से परीक्षा केंद्र के विकल्प भी मांगे जाएंगे।
               इलाहाबाद विश्वविद्यालय के परास्नातक और डीफिल कोर्स में दाखिले के लिए भी सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग कराने की कवायद शुरू की गई है। यदि इस पर फैसला हो गया तो काउंसिलिंग की प्रक्रिया आसान होने के साथ समय से प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के भी दावे किए जा रहे हैं। अभी सिर्फ स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला के लिए प्रवेश भवन में सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग कराई जाती है।
              परास्नातक  और डीफिल प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद अभ्यर्थियों की सूची और उनके प्राप्तांक का विवरण विभाग को भेज दिया जाता है। काउंसिलिंग तथा आगे की प्रक्रिया विभाग में ही पूरी की जाती है। ऐसे में काउंसिलिंग में काफी वक्त लग जाता है। परास्नातक पाठ्यक्रमाें में प्रवेश में तकरीबन तीन सप्ताह लग जाते हैं। इसके अलावा लगातार विवाद भी बने रहते हैं। डीफिल कोर्स में पिछले सत्र का प्रवेश तो अभी तक हो रहा है।
                कमेटी ऑफ एडमिशन के चेयरमैन प्रोफेसर आरके सिंह ने बताया कि इन परेशानियों को देखते हुए प्रवेश भवन में ही सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग पर विचार किया जा रहा है। यह व्यवस्था लागू होने के बाद प्रवेश प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी। साथ में कम समय में प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इससे विवादों में कमी तथा उनके तत्काल निस्तारण की संभावना भी जताई।
               हालांकि उन्हाेंने यह भी कहा कि नई व्यवस्था लागू करने में कई तरह की अड़चने हैं। सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। अंतिम निर्णय के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।



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