गरीब और वंचित समूह के बच्चे अब अपने मनमाफिक स्कूल में ले सकेंगे दाखिला

           गरीब और वंचित समूह के बच्चे अब अपने मनमाफिक स्कूल में दाखिला ले सकेंगे। बशर्ते वह स्कूल उनके घर से एक किलोमीटर के दायरे में हो। बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रवेश की शर्तों में तब्दीली कर दी है।
           शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई एक्ट) के तहत निजी स्कूलों में कक्षा एक में 25 फीसदी सीटों पर गरीब बच्चों को दाखिला दिए जाने का नियम है।
            नियम कहता है कि 25 फीसदी सीटों पर ऐसे बच्चे को कक्षा एक में दाखिला दिया जाएगा और वह कक्षा 8 तक उसी स्कूल में निशुल्क पढ़ सकता है। इनकी फीस की भरपाई सरकार 400 रुपए प्रतिमाह करती है।
             विभाग ने पिछले वर्ष से शहरों में गरीब व वंचित समूह के बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए अभियान शुरू किया था। इसमें कहा गया था कि जो बच्चे इसके लिए चुने जाएंगे और उनके घर के पास एक से अधिक मान्यताप्राप्त स्कूल है तो बीएसए उसे घर के सबसे पास के स्कूल में दाखिला देगा लेकिन अब इस नियम को बदल दिया गया है।
             अब बच्चा जिस स्कूल में आवेदन करेगा वहीं पर उसे दाखिला दिलवाया जाएगा। हालांकि स्कूल एक किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए।
             3200 बच्चे पहुंचे निजी स्कूलों में
पिछले वर्ष लगभग 3200 बच्चों को कक्षा एक में दाखिला दिलवाया गया। हालांकि 2011 से एक्ट की नियमावली लागू होने के बाद बमुश्किल 500 बच्चे ही निजी स्कूलों की चौखट तक पहुंच पाए हैं लेकिन पिछले वर्ष अभियान चलाए जाने की वजह से आंकड़ा 3 हजार तक पहुंचा।
              अभियान के तहत शहरों व कस्बों पर ज्यादा ध्यान दिया गया है जहां सरकारी स्कूल कम है। ऐसी बस्तियों के गरीब व अलाभित समूह के बच्चों की सूची बनाई गई और उनसे आवेदन करवाया गया।


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