टीईटी 2011 की धांधली : 72,825 भर्ती प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा भर्ती का विज्ञापन निकालने के साथ ही हो गया था तय

         सरकारी सुविधा बिचौलियों और दलालों के लिए कमाई का अवसर है। कहने सुनने में भले यह एक नकारात्मक अभिव्यक्ति महसूस हो किंतु वास्तविकता इसी के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कराई गई पहली शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी-2011 इसकी जीती-जागती मिसाल है।
          किसी सरकारी भर्ती प्रक्रिया में क्या क्या गड़बड़ियां हो सकती हैं, यह शोध करना हो तो टीईटी-2011 से बढ़िया संदर्भ सामग्री अन्यत्र नहीं मिलेगी। 72 हजार से अधिक बेसिक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में अब जब दो तिहाई पद भरे जा चुके हैं, एक तिहाई पदों के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिल रहे, सैकड़ों अभ्यर्थी नियुक्ति के बाद बर्खास्त हो चुके हैं, तब मूल्यांकन करने वाली फर्म के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की गई है। वाइटनर प्रकरण के बाद शासन ने यह तो स्वीकार किया था कि उसके पास ओएमआर शीट मौजूद नहीं हैं लेकिन इस स्वीकारोक्ति के बाद खामोश हो गया।
            शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद बड़ी संख्या में शिक्षक भर्ती के शोर के बीच उम्मीद की एक लहर उठी थी। हालांकि विज्ञापन निकलने के बाद से ही टीईटी और 72 हजार से अधिक रिक्तियों में भर्ती विवादों में घिर गई। अभ्यर्थियों को दो से तीन बार आवेदन करने के बाद मौका मिला।
              प्रक्रिया आगे बढ़ती कि ओएमआर शीट में वाइटनर के प्रयोग व अन्य धांधलियों के प्रकरण सामने आने लगे। मामला कई बार हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और तब से हर रोज कहीं न कहीं से इस भर्ती में गड़बड़ी की सूचना और शिकायत पर कार्यवाही के समाचार आ रहे हैं। कई बड़े अफसरों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस सारे रिकॉर्ड जब्त कर चुकी है।
              ओएमआर शीट गायब होने का राज भी तभी खुला जब पिछले साल हाई कोर्ट ने बेसिक शिक्षा सचिव को वाइटनर प्रयोग करने वालों की सूची उपलब्ध कराने और जांच के निर्देश दिए। पता चला कि परीक्षा आयोजित कराने वाले माध्यमिक शिक्षा परिषद के पास महज टीईटी-2011 के अंकपत्र की सीडी ही उपलब्ध है। मूल्यांकन करने वाली फर्म एसके प्रिंटेक डाटा क्रिएटिव सल्यूशन नई दिल्ली दिये गए पते पर मौजूद ही नहीं है।
            यानी, फर्जीवाड़ा भर्ती का विज्ञापन निकालने के साथ ही सुनिश्चित हो चुका था। जाहिर है इस स्तर के फर्जीवाड़े में बड़ी मछलियां शामिल रही होंगी जिन्हें पकड़ने के लिए जाल भी मजबूत बनाना होगा। शासन की मंशा साफ है तो इस प्रकरण की विवेचना विशेष कार्य बल अथवा केंद्रीय एजेंसी से करानी चाहिए।


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