मिड-डे मील की होगी औचक जांच : भोजन नहीं तो मिलेगा खाद्य सुरक्षा भत्ता

                मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और वितरण को लेकर होने वाली शिकायतों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने बुधवार को मध्याह्न भोजन के नियमों को अधिसूचित किया। स्कूल प्रबंधन पर इसका जिम्मा होने के साथ-साथ मान्यता प्राप्त लैब में हर महीने इसकी गुणवत्ता की औचक जांच का प्रयोजन बनाया गया है।
              किन्हीं कारणों से भोजन की आपूर्ति न हो पाने पर लाभार्थियों को खाद्य सुरक्षा भत्ता देय होगा।नए नियम में कहा गया है कि इसका कोष समाप्त होने पर स्कूल अस्थायी तौर पर अन्य कोषों का उपयोग कर सकेंगे। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधानों में मध्याह्न भोजन समेत कल्याण योजनाएं शामिल हैं।
             खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने मध्याह्न भोजन नियमों को राज्यों एवं अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श करके अंतिम रूप दिया है।
              मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अब इस योजना के लिए चावल 3 रूपए मे और गेहूं 2 रूपए मे उपलब्ध होना चाहिए जो अब तक क्रमश: 5.65 और 4.15 रपए में मिलता है।        
             नियम में कहा गया है कि अगर किसी स्कूल में लगातार तीन दिन या महीने में पांच दिन भोजन नहीं उपलब्ध कराया जाता है तब ऐसी स्थिति के लिए राज्य सरकार किसी व्यक्ति या एजेंसी की जवाबदेही तय करेगी। सरकार का मानना है कि इन नियमों और अनुपालन एजेंसियों द्वारा इन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने से पूरे देश में स्कूलों में नियमित तौर पर बेहतर ढंग से बच्चों को भोजन मिल सकेगा, साथ ही भोजन की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
                अगर किसी स्कूल में खाद्यान्न, भोजन पकाने के लिए राशि, ईंधन, रसोइया आदि उपलब्ध नहीं होने के कारण किसी दिन बच्चों को भोजन नहीं मिलता है तब महीना पूरा होने के बाद राज्य सरकार आने वाले महीने की 15 तारीख तक खाद्य सुरक्षा भत्ता उपलब्ध कराएगी।
                   स्कूलों में भोजन पकाने के लिए साफ सफाई की सुविधा पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि शिक्षा के अधिकार कानून 2009 के तहत स्कूल प्रबंधन समिति मध्याह्न भोजन योजना की देखरेख करेंगे साथ ही वे भोजन की गुणवत्ता एवं साफ सफाई का भी ध्यान रखेंगे। नियमों में कहा गया है कि पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले छह से 14 वर्ष का प्रत्येक छात्र गर्म पके भोजन का हकदार है।


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