यूपी में ऑनलाइन पढ़ाई : स्कूलों में नहीं हैं कम्प्यूटर शिक्षक, 10वीं-12वीं में गिनती के छात्र पढ़ रहे कम्प्यूटर
लॉकडाउन में सारा जोर ऑफलाइन पढ़ाई पर है। अधिकांश स्कूल उपकरण, वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से अध्ययन कर रहे हैं।
लेकिन यूपी बोर्ड के 27 हजार से अधिक स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा पूरी तरह से ध्वस्त है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने तीन साल पूर्व पहली बार एलटी ग्रेड कंप्यूटर शिक्षकों के 1673 पदों पर भर्ती शुरू की थी।
ऐसे में इस सत्र में कंप्यूटर शिक्षक मिलना संभव नहीं है।
यही हाल प्रदेश के 4200 से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का है।
कुछ स्कूलों में वित्तविहीन अनुभाग के नाम पर कम्प्यूटर पढ़ाने के लिए शिक्षक रखे जाते हैं लेकिन अधिकांश स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षक नहीं होते हैं।
आरएसएस की ओर से संचालित स्कूलों और कुछ चुनिंदा स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो बाकी में न तो कंप्यूटर है और न ही कंप्यूटर शिक्षक।
इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का सामाजिक आर्थिक स्तर इतना कमजोर है कि वे हाईटेक पढ़ाई करने में समर्थ नहीं हैं।
यही कारण है कि उस राज्य सरकार ने भले ही 20 अप्रैल से यूपी बोर्ड के स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी है लेकिन इसका लाभ लेने वाले बच्चों की संख्या बहुत कम है।
हाईस्कूल और इंटर में गिनती के छात्र कंप्यूटर की पढ़ाई कर रहे हैं। कंप्यूटर शिक्षा की स्थिति का अंदाजा इसी से लागू किया जा सकता है कि 2019-20 सत्र में हाईस्कूल के 30 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं में 65 हजार से भी कम बच्चों ने कंप्यूटर विषय लिया था। इंटर में लगभग 26 लाख छात्र-छात्राओं में से 18 हजार से भी कम बच्चों ने कम्प्यूटर की पढ़ाई की थी।
डॉ। राव भूषण (प्रदेश महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ) ने कहा- प्रदेशभर के राजकीय विद्यालय कम्प्यूटर शिक्षक विहीन हैं।
सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों की स्थिति भी यही है। ऐसे में जब प्रदेश के अधिकांश शिक्षक स्वयं कम्प्यूटर शिक्षा से अनभिज्ञ हैं तो वे शिक्षण सामग्री का मॉड्यूल किस प्रकार तैयार कर सकते हैं।
लेकिन यूपी बोर्ड के 27 हजार से अधिक स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा पूरी तरह से ध्वस्त है।
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प्रदेश के 2294 राजकीय हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में तो कंप्यूटर शिक्षक ही नहीं हैँ।माध्यमिक शिक्षा विभाग ने तीन साल पूर्व पहली बार एलटी ग्रेड कंप्यूटर शिक्षकों के 1673 पदों पर भर्ती शुरू की थी।
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लोक सेवा आयोग ने 29 जुलाई 2018 को परीक्षा कराई और परिणाम घोषित किया तो महज 36 अभ्यर्थी ही योग्य मिले। इनकी तैनाती नहीं हो सकी है।ऐसे में इस सत्र में कंप्यूटर शिक्षक मिलना संभव नहीं है।
यही हाल प्रदेश के 4200 से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का है।
कुछ स्कूलों में वित्तविहीन अनुभाग के नाम पर कम्प्यूटर पढ़ाने के लिए शिक्षक रखे जाते हैं लेकिन अधिकांश स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षक नहीं होते हैं।
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20 हजार से अधिक निजी स्कूलों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।आरएसएस की ओर से संचालित स्कूलों और कुछ चुनिंदा स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो बाकी में न तो कंप्यूटर है और न ही कंप्यूटर शिक्षक।
इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का सामाजिक आर्थिक स्तर इतना कमजोर है कि वे हाईटेक पढ़ाई करने में समर्थ नहीं हैं।
यही कारण है कि उस राज्य सरकार ने भले ही 20 अप्रैल से यूपी बोर्ड के स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी है लेकिन इसका लाभ लेने वाले बच्चों की संख्या बहुत कम है।
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10वीं-12वीं में गिनती के छात्र पढ़ रहे कम्प्यूटरहाईस्कूल और इंटर में गिनती के छात्र कंप्यूटर की पढ़ाई कर रहे हैं। कंप्यूटर शिक्षा की स्थिति का अंदाजा इसी से लागू किया जा सकता है कि 2019-20 सत्र में हाईस्कूल के 30 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं में 65 हजार से भी कम बच्चों ने कंप्यूटर विषय लिया था। इंटर में लगभग 26 लाख छात्र-छात्राओं में से 18 हजार से भी कम बच्चों ने कम्प्यूटर की पढ़ाई की थी।
डॉ। राव भूषण (प्रदेश महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ) ने कहा- प्रदेशभर के राजकीय विद्यालय कम्प्यूटर शिक्षक विहीन हैं।
सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों की स्थिति भी यही है। ऐसे में जब प्रदेश के अधिकांश शिक्षक स्वयं कम्प्यूटर शिक्षा से अनभिज्ञ हैं तो वे शिक्षण सामग्री का मॉड्यूल किस प्रकार तैयार कर सकते हैं।
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